मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन

अंगारक दोष पूजा

मंगल एवं राहु की युति से बनने वाले अंगारक दोष की शांति हेतु वैदिक पूजा।

अंगारक दोष पूजा
अंगारक दोष पूजा क्या होता है?

परिचय

अंगारक दोष तब बनता है जब जन्म कुंडली में मंगल एवं राहु एक साथ स्थित होते हैं। पारंपरिक ज्योतिष में इसे एक तीव्र दोष माना जाता है, जिसकी शांति हेतु विधिपूर्वक पूजा-अनुष्ठान करवाने की परंपरा है।

मंगलनाथ मंदिर का महत्व

मंगल ग्रह के जन्मस्थान अंगारेश्वर महादेव मंदिर में अंगारक दोष शांति पूजा का विशेष पारंपरिक महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव ने अंधकासुर राक्षस का वध किया था, उस समय उनके शरीर से गिरी पसीने की बूंद से मंगल ग्रह की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए यह स्थान मंगल ग्रह का जन्मस्थान भी माना जाता है। यहाँ अनुभवी पंडितों द्वारा संपूर्ण विधि-विधान से यह अनुष्ठान करवाया जाता है।

✨ पारंपरिक लाभ

अंगारक दोष पूजा के पारंपरिक लाभ

तीव्र ग्रह दोष की शांति हेतु पारंपरिक अनुष्ठान

मानसिक स्थिरता एवं शांति की कामना

पारिवारिक एवं वैवाहिक जीवन में सामंजस्य हेतु मान्यता

विधिपूर्वक संकल्प के साथ पूजा

🙏

आचार्य अक्षत शर्मा

अनुभवी वैदिक पंडित

अंगारक दोष पूजा पंडित आचार्य अक्षत शर्मा जी द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान से मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन में संपन्न करवाई जाती है। आपकी कुंडली एवं आवश्यकता अनुसार पूर्ण मार्गदर्शन एवं परामर्श भी दिया जाता है।

📋 सम्मिलित सेवाएँ

पूजा में क्या-क्या शामिल है

1

संकल्प एवं कुंडली अनुसार विधि

2

अंगारक दोष शांति अनुष्ठान

3

रुद्राभिषेक एवं मंगल पूजन

4

हवन एवं पूर्णाहुति

5

प्रसाद एवं आशीर्वाद

🤔 क्या आप इनमें से किसी कारण से पूजा करवाना चाहते हैं?

इन स्थितियों में यह पूजा सहायक मानी जाती है

⚠️ वैवाहिक जीवन में तनाव

⚠️ क्रोध या अशांति का अधिक अनुभव

⚠️ दुर्घटना संबंधी पारंपरिक भय

⚠️ पारिवारिक कलह

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